old diary

1 जिनकी यादों के दीये हम
दरो दीवार पर जलाते रहे
वो यूँ ही बस यूँ ही हमें
उँगलियों पर नचाते रहे

2 यदि यूँ ही हर शब को गुमनाम होना है
हर पहर को इश्क पर कुर्बान होना है
तो सम्भालकर रखीये दिल अपना
आपका भी एक दिन यही अंजाम होना है

3 फूलों को तेजाब से जलाने की हिमाकत है
ये जो जिस्म देखकर की गई मोहब्बत है
चाहत पूरी होती नहीं ,सिर्फ चाहने से
ये कुर्बत है, इजाजत है ,इबादत है।

4 पीढियों के चैन ओ अमन के लिए
नफ़रत अच्छी नहीं है वतन के लिए

5 चलते हुए रास्तों का कोई, निशान होना चाहिए
छोटा ही सही पर कोई, मुकाम होना चाहिए
बेशक गर्दिशों में बीती है बेमोल ज़िन्दगी
पर किसी पत्थर पर हमारा भी ,नाम होना चाहिए

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/11/2018
  2. rakesh kumar Rakesh kumar 23/11/2018

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