मुक्तक – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

घुट घुट के न मारो, दिल पे असर होता है
कड़वी ना बोलो यार, ये जहर होता है।
नाउम्मीदी में रहम, थोड़ा भी तो कर दो
जिंदगी सबों के लिये, एक सफ़र होता है।

जीत कर हार गये , मेरी मजबूरी थी
पाने के लिये प्यार, ये भी जरूरी थी।
जिद के खातिर मैंने उनकी लाज रखी
क्योंकि मेरे नजरों में प्रीत अधूरी थी।

पर्दे को पर्दा ही रहने दो, तो अच्छा है
जान पाये जो हम, कहने दो तो अच्छा है।
ये नजाकत है या कुछ और समझ लें हम
अंजुमन ए दिल को पढ़ने दो तो अच्छा है ।

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  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 12/11/2018

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