महोब्बत का मारा – सर्वजीत सिंह

महोब्बत का मारा

महोब्बत को तेरी हमने नकारा नही
पर तेरी बेरूखी भी हमें गवारा नहीं

सुबह शाम किया है बस तुझे सजदा
फिर भी लब से नाम तेरा पुकारा नहीं

हजारों तूफान उठते हैं इस दिल में
फिर भी कभी लिया कोई सहारा नहीं

लाखों दीवाने हैं तेरे इस हुस्न के
पर आशिक मुझ सा कोई प्यारा नहीं

ये तो दिल है जो पागल है तेरी महोब्बत में
वरना सर्वजीत तेरी महोब्बत का मारा नहीं

सर्वजीत सिंह
sarvajitg@gmail.com

4 Comments

  1. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 06/11/2018
    • sarvajit singh sarvajit singh 08/11/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 08/11/2018
    • sarvajit singh sarvajit singh 08/11/2018

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