हिंदुस्तानी दिए

 



🇮🇳               🇮🇳 हिंदुस्तानी दिए” 🇮🇳                🇮🇳

 



क्यों न कुम्हार के दो दिन को खुशमय बनाते हैं,            आइये अब हम सभी मिलकर हिंदुस्तानी दिए जलाते हैं।


कुम्हार बड़े ही प्रेम से अपने हाँथो से दिए बनाते हैं,
आइये अब हम सभी मिलकर हिंदुस्तानी दिए जलाते हैं।


प्रेम से कुम्हार के हाँथो के बने दिए को हम अपने गले से लगाते हैं,
आइये अब हम सभी मिलकर हिंदुस्तानी दिए जलाते हैं।


उन प्रेम के दिए से हम अपने घर में बने आँगन को सजाते हैं,
आइये अब हम सभी मिलकर हिंदुस्तानी दिए जलाते हैं।


अपने हाँथो में है तो फिर क्यों न कुम्हार के बच्चों को हंसाते हैं,
आइये अब हम सभी मिलकर हिंदुस्तानी दिए जलाते हैं।


“सत्यम श्रीवास्तव” की इस बात को हम सभी दूर-दूर तक पंहुचाते हैं,
आइये अब हम सभी मिलकर हिंदुस्तानी दिए जलाते हैं।



                         कवि “सत्यम श्रीवास्तव”
🇮🇳 प्रयागराज 🇮🇳



 

 

 

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