तुम्हारे न होने से

शीर्षक-तुम्हारे न होने से
तुम्हारे न होने से
कुछ भी पूरा नही होता
बाजुएं सोती है अकेली
उन बाजूओं को तुम्हारा इल्म नहीं रहता
राते लगती है काली-काली
उन रातो में कोई मोम भी नही जलता
घर तो अब भी है बसा हुआ
जैसे छोड़ कर गयी थी
पर घर के आईने में
तुम्हारा चेहरा नही ठहरता
तुम्हारे न होने से
समंदर में बूंदे तो रहती है
बूंदो में समंदर नही रहता
सोने को तो सो लेता हूँ
पर आंखों में नींद नहीं ठहरता
जीने को तो जी लेता हूँ
पर तुम्हारे बिना
जीने को जी नहीं करता–अभिषेक राजहंस

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