प्रीत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

जीत कर हार गये मेरी मजबूरी थी
प्यार पाने के लिये ये भी जरूरी थी।
जिद के खातिर मैंने उनकी लाज रखी
क्योंकि मेरे नजरों में प्रीत अधूरी थी।

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 05/11/2018
  2. Abhishek Rajhans 07/11/2018

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