नव पराग

तुम बिन सब गौण प्रिय
लालसी इस धरा पर
कर रहे हैं क्रंदन
तटस्थ भी मेरी व्यथा पर

दीप्त जलती और उजली
ज्योति का अनुराग लेकर
प्रफुटित हो रहे प्रसून
नित् नव पराग लेकर
राकेश कुमार

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 01/11/2018
  2. rakesh kumar Rakesh kumar 03/11/2018

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