काश – शिशिर मधुकर

काश तुम साथ मेरे बस यहाँ पे चल रहे होते
दिन अपनी जवानी के खुशी से ढल रहे होते

अगर कोई मुझे भी वक्त पे सच को दिखा देता
आज मन को मसोसे हाथ यूँ ना मल रहे होते

तमन्ना मेरी अगर कोई कभी पूरी हुई होती
अधूरे सपने मेरी आँखों में यूँ ना पल रहे होते

तेरे गेसू की छाया ने मुझे गर चुन लिया होता
यूँ तन्हा धूप में ना चश्म मेरे जल रहे होते

मेरे मन में अधूरी प्यास गर कोई नहीं होती
झूठे लोग मधुकर फिर मुझे ना छल रहे होते

शिशिर मधुकर

4 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 30/10/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 01/11/2018
  3. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 06/11/2018
  4. Abhishek Rajhans 07/11/2018

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