आ भी जाओ ना

अम्बर की ओट से निकलकर
बादल से उसकी बूंदे लेकर
बरस जाओ ना री बरखा
सूखते लबो को भींगा जाओ ना
तुम मुझमे खुद को मिला जाओ ना
समंदर बना जाओ ना
आ जाओ ना
आ भी जाओ ना

आँखों मे कैद है नींदे
नींदों में आते है सपने
उन सपनों जी लूँ तुम्हे
सपनो को हकीकत बना जाओ ना
तुम मुझसे मिलने
आ जाओ ना
आ भी जाओ ना

जलने का डर कहाँ है मुझे
जो तुम आओ आग बनकर
तो आ भी जाओ
बहुत धुंआ धुआँ सा हो गया हूँ
संग अपने जला जाओ ना
आ जाओ ना
आ भी जाओ ना—अभिषेक राजहंस

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