किस्मत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

अब किस्मत की खेल नहीं होता
दबंगों का घर है जेल नहीं होता।

टारगेट पर चलते हैं जान लेते हैं
उनका ये प्लान फेल नहीं होता।

घूसखोर प्रशासन साथ रहते हैं
पर इनका कभी मेल नहीं होता।

कुछ तो पैसों पर फिसल जाते हैं
कुछ माथे इनका तेल नहीं होता।

अपहरण डकैती लेबी वसूलते हैं
पड़े चक्कर में तो बेल नहीं होता।

हर मंजिल कांटो से भरा है बिन्दु
जाने को हर जगह रेल नहीं होती

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 26/10/2018
  2. Rinki Raut Rinki Raut 26/10/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 29/10/2018

Leave a Reply