निशान ए मुहब्बत – शिशिर मधुकर

दूरियां मुझको अब तुम जताने लगे हो
अपना संग वो अनोखा भुलाने लगे हो

तड़प कोई मिलने की दिखती नहीं अब
खुद को महफिल से मेरी बचाने लगे हो

इस जहाँ में मुहब्बत ना तुम पाप समझो
फिर ये अंखियां क्यों मुझसे चुराने लगे हो

कभी पल हिज्र का था ना तुमको गवारा
अब पूरा बरस कैसे तन्हा बिताने लगे हो

ये निशान ए मुहब्बत ना छूटेंगे हरगिज़
तुम मधुकर क्यों इनको मिटाने लगे हो

शिशिर मधुकर

7 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 25/10/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/10/2018
  2. Rinki Raut Rinki Raut 26/10/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/10/2018
    • santosh singh 03/12/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 27/10/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/10/2018

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