ना कोई तड़प है – शिशिर मधुकर

ना कोई तड़प है ना यादें हैं बाकी
ना हाला बची है तुझपे ओ साकी

कह दो क्या लेने तेरे दर पे आऊं
पुराना सा रिश्ता वो कैसे निभाऊं

तुझे अपने मैखानें कीं बस पड़ी है
मैं जी कैसे पाऊँ कठिन ये घड़ी है

मुझे कोई नैनॊं से फिर से पिला दे
मैं मर सा रहा हूँ मुझ को जिला दे

ये वादा मैं तुझ से फिर तो करूँगा
पलकों में तुझको हर पल धरुँगा

शिशिर मधुकर

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 24/10/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/10/2018

Leave a Reply