मेरी परवाज़ बन गए – शिशिर मधुकर

दुनिया से भिड़ गए मेरी आवाज़ बन गए
प्यारे सनम तुम मन का मेरे राज़ बन गए

खुद को भुला मैं जब तेरे आगोश में गिरी
ऐ हमनवा तुम ही मेरे अल्फाज़ बन गए

पर थे मेरे कमज़ोर ना उड़ना मुफीद था
तुम हाथ को थामे मेरी परवाज़ बन गए

तन्हा रही तो मुझको कोई मान ना मिला
संग जुड़ गई तेरे तो सब अंदाज़ बन गए

तूने छुआ बदन मेरा जिस तिश्नगी के संग
फिर से लो मधुकर मधुर सा साज़ बन गए

शिशिर मधुकर

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 24/10/2018
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 24/10/2018

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