जिम्मेदारी – शिशिर मधुकर

अमृतसर में उजडा दशहरे का मेला
कैसा ये खेल देखो कुदरत नें खेला
नज़र सावधानी से थोड़ी जो हट गई
रेल कीं पटरी फिर लाशों से पट गई

देखी जो घटना हुआ दुख है भारी
पर क्या तय होगी कोई जिम्मेदारी
मंजर जो ऐसा कभी फिर ना आए
खुशियों को पल में जो मातम बनाए

ज़रा सोचो दुर्घटना जहाँ ये घटी थी
रेल कीं पटरी वहाँ एकदम सटी थी
किसने वहाँ फिर लगने दिया मेला
जो मौत के तांडव को लोगों नें झेला

इन झूठी जांचों से कुछ भी ना होगा
जनता नें फिर लापरवाही को भोगा
अगर हम सुरक्षा को अब भी ना चेते
यूँ ही जानें अपनी रहेंगे फिर तो देते

शिशिर मधुकरi

4 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 22/10/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/10/2018
  2. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 22/10/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/10/2018

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