ये एहसान तेरा है – शिशिर मधुकर

कहाँ जाएं मिलें किस से बड़ी मुश्किल ने घेरा है
मुझे अपनों नें क्या लूटा कोई दिखता ना मेरा है

मुझे रिश्तों में जकडा है मगर ना प्यार बरसाया
अगर जिंदा हूँ मैं अब तक तो ये एहसान तेरा है

भले ही रात लम्बी है और रस्ता भी मुश्किल हैं
कोई जगह तो आएगी जहाँ खुशियों का डेरा है

मुकद्दर से कोई कैसे लड़े ये समझा नहीं मैं तो
कहीं दुश्वारियां दी हैं कहीं बस सुख बिखेरा है

हाथों को गर ना थाम कर मधुकर चले हमदम
बड़ा दूभर समझ लो ज़िंदगी का फिर ये फेरा है

शिशिर मधुकर

4 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 22/10/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/10/2018
  2. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 22/10/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/10/2018

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