मिलन दो रूह का – शिशिर मधुकर

मैं तेरे दिल में बसती हूँ मुझे अभिमान होता है
देख के गैर तेरे पास चैना मन का भी खोता है

तड़पती हूँ तेरे बिन मैं तुझे तो सब पता है फिर
बेवफा जान के मुझको अकेला तू क्यों रोता है

इश्क तो हो गया हमको मगर सच तो नहीं बदला
बोझ परिवार का संसार में हर इंसा ही ढोता है

मिलन दो रूह का ही तो सदा असली मिलन होगा
देख के दूरियां तन की तू पलकें क्यों भिगोता है

वक़्त पे कोई जीवन में विजय तो पा नहीँ सकता
हर एक इंसान को मधुकर ये तो नश्तर चुभोता है

शिशिर मधुकर

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 22/10/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/10/2018

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