मिला ना वो मगर अब तक – शिशिर मधुकर

मुहब्बत जिस को होती है वो तो नज़दीक आता है
खुद की हस्ती को साथी के लिए जड़ से मिटाता है

जो रिश्ता निभाता है फ़कत एक आस के कारण
मिले ना उसको जो मन का तो वो नीचा दिखाता है

सभी कुछ पास है फिर भी अधूरापन सा लगता है
अकेलापन मुझको इस भीड़ में अब भी सताता है

उम्र गुजरी है ये सारी मिला ना वो मगर अब तक
जो अपना चेहरा छुपा के मेरे लिए आँसू बहाता है

बड़ा जालिम ज़माना है यकीं अब तो नहीँ होता
वो मधुकर साथियां को अपनी पलकों पे बिठाता है

शिशिर मधुकर

6 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 17/10/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/10/2018
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 18/10/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/10/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 22/10/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 22/10/2018

Leave a Reply