शक्ति और स्त्री

दुर्गा का पर्व
स्त्री शक्ति का पर्व
भक्ति का पर्व

लज्जित होती
औरत हर रोज
तार-तार है

माँ कहते हो
मूर्ति को पूजते हो
पाखंड क्यों?

हत्या बेटी की
गर्भपात कराते
पापा करते

बलात्कार है
अत्याचार है यहाँ
आराधना क्यूँ ?

असफल है
पाखंड तुम्हारा.. हां
सिर्फ शोर है

अधिकार दो
शिक्षा का अवसर
जीने का मौका

शक्ति की पूजा
स्त्री का सम्मान
वरदान है

रिंकी

8 Comments

  1. Rajeev Gupta Rajeev Gupta 16/10/2018
    • Rinki Raut Rinki Raut 17/10/2018
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/10/2018
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 17/10/2018
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 18/10/2018
  5. Rinki Raut Rinki Raut 22/10/2018

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