साथी गैर लगता है – शिशिर मधुकर

मुहब्बत गर नहीं हो बीच साथी गैर लगता है
हर बात में उसकी फिर तो एक बैर लगता है

अगर मन में छुपी बातों को कोई जान लेता है
सफ़र जीवन में ऐसे मीत के संग सैर लगता है

सर को झुका इंसान नें इस जग को जीता है
बड़ा होशियार है वो गर किसी के पैर लगता है

किसी को दूर कर देने से अब भी डोर ना टूटी
मुझे तो आज भी वो पास दिल के खैर लगता है

सांस तो चल रही है पर यही जीवन नहीं होता
हर लम्हा बड़ा नीरस एक मीत के बगैर लगता है

शिशिर मधुकर

3 Comments

  1. Rinki Raut Rinki Raut 16/10/2018
  2. Rinki Raut Rinki Raut 16/10/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/10/2018

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