अभी उम्मीद बाकी है – शिशिर मधुकर

वो मेरे साथ रहता है मगर फिर भी ना मेरा है
फ़कत तन्हाइयों नें ज़िन्दगी में मुझको घेरा है

बड़ी लम्बी हुईं है रात इस जीवन के मेले की
अभी उम्मीद बाकी है कहीं ठिठका सवेरा है

जाने क्या हुआ मुझसे कि मैंने राह जो पक्डी
हर इक इंसान उसपे घूमता कातिल लुटेरा है

जहाँ अविश्वास होता हो गैर जहनों में बसते हो
वहाँ खुशियों का चाहो भी नहीं होता बसेरा है

बड़े अरमान जीवन में संजोए थे कभी मधुकर
मनमर्जी से किस्मत नें मगर सब कुछ उकेरा है

शिशिर मधुकर

4 Comments

  1. Arun Kant Shukla Arun Kant Shukla 14/10/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/10/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 15/10/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/10/2018

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