कोई तो बताये वो कैसे यहाँ आया था

कोई तो बताये वो कैसे यहाँ आया था
मेरा मुकद्दर सहसा बदलने यहाँ आया था।

कितना खामोश, तन्हा, उदास दिख रहा है वो
ना मालूम किस-किससे मिलके यहाँ आया था।

कितना अजीब चिराग है बुझाये बुझता नहीं
वो किस अँधेरे से गुजरके यहाँ आया था।

इस राह की धूल पावों को जलाने लगी है
किसका दहकता जिगर टहलने यहाँ आया था।

मेरी ही आवाज का झोंका मुझे रुला गया है
ना जाने किस दर्द को छूके यहाँ आया था।
…. भूपेन्द्र कुमार दवे
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3 Comments

  1. Arun Kant Shukla Arun Kant Shukla 14/10/2018
    • bhupendradave 15/10/2018
  2. Madhu tiwari Madhu tiwari 17/10/2018

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