मुहब्बत में वो ताकत है – शिशिर मधुकर

सुबह उठते ही जो मुझको तुम्हारी दीद मिल जाए
मेरे मन के भीतर की हर कली फिर तो खिल जाए

तू अपने मरमरी हाथों से मेरी जुल्फों को सहला दे
फिर तो हर घाव सीने का मेरा चुटकी में सिल जाए

मुहब्बत में वो ताकत है ख़बर जिसकी नहीं तुमको
अगर ये चाह ले थोड़ा भी तो परबत भी हिल जाए

मेरा गर बस चले तो मैं तुम्हें पलकों में रख लूँगा
कहीं धरती के कांटों से बदन तेरा ना छिल जाए

खुद को मुझसे छुपाने की अदा अब छोड़ दो न तुम
कहीं मधुकर का ये दिल टूट के बन ना कुटिल जाए

शिशिर मधुकर

4 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 10/10/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/10/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 11/10/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/10/2018

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