कुछ तो होता है

बहुत कुछ तो नहीं
पर कुछ तो होता है
जिसे होते देना चाहता हूँ
किसी और के लिए
खुद को बहकने देना चाहता हूँ
होती हैं कुछ यादें
होते हैं कुछ जज्बात
जो याद दिलाती है उसकी
उसकी यादों में बस
जीते रहना चाहता हूँ

बहुत कुछ तो नहीं
पर कुछ तो होता है
जब भी देखता हूँ उसे
बस उसे ही
देखते रहना चाहता हूँ
उसके पायल का संगीत
अपने कानों में हमेशा
बजते देना चाहता हूँ
कहीं भूल ना जाऊं उसे
बस इसलिए उसे
कोरे कागज पर लिखते रहना चाहता हूँ-अभिषेक राजहंस

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 10/10/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 11/10/2018

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