जब भी तुम मिले – शिशिर मधुकर

राहों में जब भी तुम मिले यादें पुरानी आ गईं
ऐसा लगा अम्बर में ज्यों काली घटाएँ छा गईं

ये गुमां मुझ को हुआ कि तुम मेरे नज़दीक थे
हँसती हुईं छवियां तेरी दिल को मेरे तो भा गईं

दुनिया बड़ी अंजान है कुछ भी नहीं ये जानती
सांसें मेरी ये तेरी सांस की सारी सुगन्धें पा गई

मुझको समां वो याद हैं जब होंठ होंठो से मिले
गीत कितने धड़कने फिर मेरी मिलन के गा गईं

जब भी तुमने चाँद सा मुखड़ा किया मेरी तरफ़
बिजलियां तेरे हुस्न की मधुकर कयामत ढा गईं

शिशिर मधुकर

4 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 10/10/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/10/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 11/10/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/10/2018

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