मिलन की आस – शिशिर मधुकर

छुप के सही पर तुम जो मुझसे बात करते हो
फिर से मिलन की आस में आहें सी भरते हो

तनहाइयां तुमको ना किसी बिधि रास आएंगी
नज़दीक आने से मेरे तुम इतना क्यों डरते हो

मैं तो डूबा सा रहता हूँ फ़कत तेरे ख्यालों में
मेरी यादों की नदिया पार तुम कैसे उतरते हो

ग़म तुमसे बिछुड़ने का मुझे परेशान करता है
इस गहरे समुन्दर से कहो तुम कैसे उबरते हो

नज़र के सामने आके ना पलकों को उठाते हो
दुपट्टे का एक कोना फ़कत मधुकर कुतरते हो

शिशिर मधुकर

4 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 10/10/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/10/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 11/10/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/10/2018

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