पल पल करके याद तुझे

रातों दिन कुछ जीवन के मेरे , तुमसे मिलकर रंगीन हुए

दुनिया के झगड़ों को छोड़ , प्यार में जो हम लीन हुए

उन लम्हों को मैं याद किये , रातों में अब न सोता हूँ

मैं पल पल करके याद तुझे , रातों में ऐसे रोता हूँ

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खुद से बाहर आकर के हम , खुशहाली के पल चुन पाए

पहले ये प्रेम रोग लिया , तब जाकर धड़कन सुन पाए

हर रात हमारी सूनी सोती , तुमसे मिलकर कुछ रंग मिले

एक नया सवेरा दिया तुम्ही ने , जीने के तुमसे ढंग मिले

पर अब जीवन में प्यार नहीं , आशायें सारी खोता हूँ

मैं पल पल करके याद तुझे , रातों में ऐसे रोता हूँ

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क्या अजब वक्त वो जीवन का , मनबाग मे हर्ष की कलियाँ थी

दिन भर चलने पर भी न थकते , तुम्हारी ऐसी वो गालियाँ थी

देखने को बस एक छवि तुम्हारी , अम्रत पाने को मन तरसे

हो जाये जिस पल में दीदार , भर भर अम्रत उस पल बरसे

अब तो कमरे की दीवारों संग , नैना अपने भिगोता हूँ

मैं पल पल करके याद तुझे , रातों में ऐसे रोता हूँ

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बदल गया कितना कुछ अब , उन रातों जैसा जश्न कहाँ

तुम लौट के आओगी या न , मन मे अब भी ये प्रश्न रहा

पर दिल मेरा मासूम बड़ा , जबरन आशायें लाता है

तुमसे मिलना मुश्किल फिर भी , ये गीत तुम्हारे गाता है

करुणा की वर्षा हो या न , मैं बीज प्यार के बोता हूँ

मैं पल पल करके याद तुझे , रातों में ऐसे रोता हूँ

कवि – मनुराज वार्ष्णेय

One Response

  1. arun kumar jha arun kumar jha 04/10/2018

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