दुनिया – अनु महेश्वरी

झुठ ने इतना पैर पसार लिया,
विश्वास हिचकोले खाता अब।

संदेह ने नज़रों में घर जो किया,
भरोसा भी तो डगमगाता अब।

दिल की कैसे कोई सुने जब,
दिमाग ही हावी हो जाता अब।

फ़रेब से भरी इस दुनिया में,
इंसा कहाँ रिस्ते निभाता अब।

कैसे कोई समझौता हो यहाँ,
अहम ही जब टकराता अब।

 

अनु महेश्वरी

5 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/10/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 04/10/2018
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 04/10/2018
  4. arun kumar jha arun kumar jha 04/10/2018

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