लेकिन सीमा होती है ……..

माना कि संस्कार तुम्हारा
विवेक कभी न खोना है
कोई कितना कड़वा बोले
काम मगर सह जाना है

लेकिन भैया कब तक ऐसे
आँख मूंदकर बैठोगे
अधिकार अपने हिस्से का
गैरों को फोकट बाँटोगे

बंदर सारे उछल उछल कर
तुमको आँख दिखाते है
हक छीन कर आज तुम्हारा
तुमको बोल सुनाते है

माना अपना दिल बड़ा हो
लेकिन सीमा होती है
किस काम की ये जिंदगी
सब कुछ सह कर रोती है
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शशिकांत शांडिले, नागपुर
भ्र.९९७५९९५४५०

9 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 03/10/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 04/10/2018
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 04/10/2018
  4. arun kumar jha arun kumar jha 04/10/2018
  5. Rinki Raut Rinki Raut 16/10/2018

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