मुक्तक – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

01

वाह रे इंसान,  जूल्म देख क्यों चुप रहता है
क्यों नहीं आगे आता, बुजदिल सा छुप रहता है।
जुबां पे ताला बंद रख, कुछ न बोल पाता है
सुस्त पड़ा मनुज, अंधेरा जैसे गुप रहता है।

02

ना रहने दिये मन में, ना बसने ही दिये दिल में
लोग करते रहे शोर, ना जमने दिये महफिल में।
मंजिल पाने में कोई कसर, न छोड़ी थी हमनें
जीने दिये हमें, ना मरने ही दिये मुश्किल में।

03

डरके बहुत देखे दुनिया में हमनें चुप रहकर
हमपे खूब जूल्म ढाए मिलके जमाने वाले।
हौसला जिंदा है शेर की तरह दहाड़ेंगे हम
जोर जितना भी लगा दे हम पे जमाने वाले।

04

समय मिला है आपको, तो कुछ योग करें
हर आदमी एक दूसरे का, सहयोग करें।
भटकते को संभालना, ही तो है जिन्दगी
वक्त बेकार ना जाय, इसका उपयोग करें।

05

दिखावे की हर बात ही कुछ अलग है जनाब
हकीकत तो सिर्फ आइने में ही रहती हैं।
आप जितना भी भाग लो पूरी ताकत से
गम या खुशी हरदम जीने में ही मिलती हैं।

06

सब धर्मो से बढ़कर, है मानव धर्म महान
कर्तव्य का ही ख्याल रख, कर्म है महान।
माया ममता छोड़ दो, मोह का ये जंजाल
लोभ किए तो कहीं नहीं,तेरी गलेगी दाल।

4 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 04/10/2018
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 04/10/2018
  3. arun kumar jha arun kumar jha 04/10/2018

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