जीत लिखों

चुनो लक्छ्य अपने पथ की अोर कूच करो
अपने सपनो के पन्नो पर जीत लिखो
जीत ही सोचो , जीत ही देखो, जीत रटो
हार , हराने की सोचो से दूर हटो ।

इसको हराना उसको हरा कर क्या करना
हम अलबेले अपने आप से है लड़ना
जहा अब हो उससे बढने की सोच रखो
उठो अभि इस नई सोच की नीव रचो।

हराने की सोचो से जीत कहा होगा
हीन ,द्वेश ,दबाब से मन भरा होगा
जीत की सोचोगे तो मन पुलकित होगा
अपनी तुलना से ही मन हषिर्त होगा

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 04/10/2018
  2. arun kumar jha arun kumar jha 04/10/2018

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