इंसानियत ……..

धर्म और जाति में अब तक बटे हैं लोग
पाखंड की तलवार से कितने कटे हैं लोग

इंसानियत की बातें तो हर चौराहे होती है
दिल ही दिल में अपनाही धर्म रटे हैं लोग

खुली आँखों से यहां सच दबाया जाता है
झूठी ही बातों को सच करने डटे हैं लोग

तड़प रहा मरता कोई जान कौन बचाएगा
जाने क्यों गैर समझकर परे हटे हैं लोग

देख तमाशा इंसानों का शशी हुआ हैरान
मानवता भुलाकर के खुदमें सिमटे हैं लोग
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शशिकांत शांडिले, नागपुर
भ्र.९९७५९९५४५०

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/09/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 29/09/2018

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