दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

एक कहानी पर अधारित चंद दोहे।
1
भारी कलियुग पड़ रहा, मानव मन के साथ,
दिल भी पत्थर हो गया, इस कलियुग के हाथ।
2
कुमकुम निकली सैर को, जाती सड़क किनार
दुर्घटना एक घट गई, दौड़ पड़े नर – नार।
3
लोग तमाशा बन गये, कुमकुम करे गुहार
जल्दी इसको ले चलो, इनकी सुनो पुकार।
4
भागे उल्टे पाँव सब, देख के लहुलुहान
कुमकुम अपनी गोद में, रख ली उसकी जान।
5
दौड़ी – दौड़ी आ गई, डकटरनी के पास
पल भर चैन उसे मिला, दूसरे पल उदास।
6
कुमकुम ऐसे रो पड़ी, कहाँ गया इंसान
मूरत में बस जान है, सूरत में अभिमान।

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 29/09/2018
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 29/09/2018

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