कल्पना का कोई छोर नहीं – डी के निवातिया

कल्पना का कोई छोर नहीं
सृजन का इसके ठोर नहीं
बिना पंख यह उड़े गगन में
इसके आगे कोई और नहीं !!
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स्वरचित : डी के निवातिया

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/09/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 29/09/2018

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