तुमको मालूम तो होगा – शिशिर मधुकर

बड़ी मुश्किल से मैंने ज़िन्दगी में तुमको पाया था
वरना तन्हाइयों में मेरे संग बस मेरा ही साया था

ना कोई साथ था मेरे तन भी घावों से छलनी था
अपने ग़म को भुलाने को मैंने तुमको रिझाया था

तेरी सांसों की गर्मी का मुझे एहसान है अब तक
मेरी सांसों में मिल जिसने मुझे हरदम जिलाया था

नशा उस जाम का अब तक नहीँ उतरा मेरे सर से
मेरी आँखों में अंखियां डाल जो तुमने पिलाया था

तुमको मालूम तो होगा नहीं तो जान लो अब तुम
एक फ़कत तुमसे दूरी ने मुझे कितना रूलाया था

शिशिर मधुकर

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 29/09/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/09/2018

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