देखो, तुम जगा देना

हो सके तो बता देना
मन करे तो उठा देना
तुम्हारे भीतर हीं सोया हूँ
अगर जग गए तो जगा देना
जीवन एक रणक्षेत्र ,कुरुक्षेत्र है
रथ तुम आगे बढ़ा देना
सब कुछ दावं पर लगा देना
जान से जान लड़ा देना
हाथ से गांडीव उठा लेना
शंख तुम बजा देना

चाहे खो जाए तुम्हारे कवच-कुंडल
या मोह तुम्हे बाँधने चले
चाहे तुम्हारे अपने तुम्हे साधने चले
तुम मुझे बचा लेना
मौके आते रहेंगे
बहकाने वाले बहकाते रहेंगे
जो बिक चुके हैं खुद हीं
वो तुम्हे भी बिकवा देंगे
देखो तुम बिक ना जाओ
बस इसलिए मुझे जगा देना

तुम जान नहीं पाए क्या मुझे
तो देर कहाँ हुआ अभी तक
आज जान हीं लो
ना धर्म हूँ ना संस्कार हूँ
ना कोई उपहार हूँ
ना गीता का सार हूँ
ना मस्जिद का अजान हूँ
ना कृष्ण हूँ ना कबीर हूँ
देखो तुम्हे जगाने आया
तुम्हारे भीतर का जमीर हूँ—-अभिषेक राजहंस

4 Comments

  1. kiran kapur gulati Kiran Kapur Gulati 25/09/2018
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/09/2018
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/09/2018
  4. C.M. Sharma C.M. Sharma 26/09/2018

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