सुकून जो दिल को देते हैं – शिशिर मधुकर

बढ़ाओ हाथ कि अब रातें मेरी तन्हा ना कटती हैं
मिली हैं जितनी भी सांसें हल्के हल्के सिमटती हैं

एक सी ऋतु रहेगी तो कभी ना ये डाल महकेंगी
झरे पेड़ों कि किस्मत भी इन्हीं के संग पलटती हैं

दूरियां कैसी भी कर लो जो निकलोगे नहीँ दिल से
कसक बढ़ती ही जाती हैं उल्फ़तें थोड़े ही घटती हैं

मुझसे क्यों खफा हो तुम चलो आ के मुझे कह दो
मुझे मालूम है तेरी मुस्कानें दुनिया भर में बंटती हैं

सुकून जो दिल को देते हैं इस जीवन के मेले में
नाम उनके ही मधुकर जुबानें हर पल ये रटती हैं

शिशिर मधुकर

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 29/09/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/09/2018

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