आँख खुलते ही – शिशिर मधुकर

आँख खुलते ही जो तेरा चेहरा दिखाई देता है
कोई दिन रात सनम बस तेरा ही नाम लेता है

मिलन की आग दिल में हर समय सुलगती है
उफ़नी नदिया में तभी वो नाव अपनी खेता है

किसी के दिल में तू मूरत सी बस चुकी है अब
क्या तेरा भी इस जहां में अब वो ही चहेता है

बड़ी मुद्दत से कोई ना तुमसे दिल की बात हुईं
ज़िन्दगी हाथों से यूँ फिसलती है मानो रेता है

यूँ ही मधुकर को यहाँ तुझसे नहीँ ये इश्क हुआ
रूप की स्वामिनी तुझ सा ना कोई सुचेता है

शिशिर मधुकर

4 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/09/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/09/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 26/09/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 26/09/2018

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