जाने क्यों छोड़ गए हैं वो

कल तक थे जो दुनिया मेरे
आज साथ क्यों छोड़ गए हैं वो
जो मेरे जर्रे-जर्रे में थे शामिल
आज क्यों निशाँ मिटा गए हैं वो
दिल तो उन्होंने भी लगाया था
फिर दर्द क्यों मेरे हिस्से दे गए हैं वो
यूँ तो पहले मिलने के रोज बहाने ढूंढते थे
आज कैसे मेरा पता भूल गए हैं वो
जिरह रोज की है मैंने उनके प्यार की
किस बात की सजा मुक़र्रर कर गए हैं वो
जिनके यादो के सहारे जी रहे है हम
किसलिए आखिर भूल गए हैं वो
जाने क्यों छोड़ गए हैं वो—-अभिषेक राजहंस

3 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 24/09/2018
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/09/2018
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/09/2018

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