वहम बना लिया – शिशिर मधुकर

तेरे ग़म को मैंने जो अपना ग़म बना लिया
सूखी हुईं आँखों को बेहद नम बना लिया

वर्षों के बाद एक रोशनी दिखती थी जो मुझे
भटका जो फिर से राह गहरा तम बना लिया

बातों में तेरी आ गए कि छोडोगे तुम ना साथ
खामख्वाह ही तुमको अपना दम बना लिया

ए हुस्न अपना ये हुनर सिखला भी दे मुझे
किस खूबसूरती से खुद को सम बना लिया

रिश्ते सभी मतलब के हैं ये जानता था मैं
मुहब्बतों का मधुकर तू ने वहम बना लिया

शिशिर मधुकर

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 29/09/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 29/09/2018

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