हलचल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

सुरमई आँखों में काजल क्या बात है
गली में हो रही हलचल क्या बात है।
उनकी नाज वो नखरे जान ले लेगी
हो जायेंगे कत्ल कितने क्या बात है

 

बीस बरस पढ़ने में बीता
अटका भटका बीस बरस
बीस बरस कुछ संभला भी तो
सब कुछ भूला बीस बरस।

 

अब तो मुश्किल और है जीना
जिंदगी जैसे जहर है पीना
तालीम लेकर भटक रहे हैं
लाकर आरक्षण इसे है छीना।

One Response

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 22/09/2018

Leave a Reply