शातिर – डी के निवातिया

शातिर

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वो देखो, वो जो भोला सा शख्स है
ये मत पूछो वो कितना शातिर है,
बात न पूछो उसकी हद-ऐ-शराफत की
गरीबी का बाज़ार सजाना जानता है !
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कितना बड़ा दयालु समझते है सब
बड़ा शौकीन है कुचलने में टूटी-फूटी मड़ैया
तोड़कर सपने अकिंचन मानवो के
अमीरी को अपना गुलाम बनाना जानता है !!

डी के निवातिया

3 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 24/09/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 25/09/2018
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/09/2018

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