मालूम है मुझे

मालूम है मुझे
वो चली जायेगी एक दिन
सब तो चली ही जाती हैं
वो जो चुपचाप सी रहकर
सब कुछ सह कर
बस मुस्कुराती रहती है
भले मैं माँ के आँखों का तारा हूँ
पर वो तो चाँद है
उसकी चांदनी से ही तो उजियारा है
एक दिन चली जाएगी वो
किसी और के लिए
अपनी रौशनी समेट कर
वो बहन मेरी
मुझसे दूर हो जायेगी

मालूम है मुझे
मैं उसे बहुत सताता हूँ
अपने होमवर्क भी तो
उसी से करवाता हूँ
उसे कैसे बताऊँ
हर राखी उसे
देना बहुत कुछ चाहता हूँ
पर कुछ दे नहीं पाता
बस इतना ही कहता हूँ
मैं हमेशा रहूँगा
तुम्हारी जिम्मेदारियों के लिए नहीं
तुम्हारे आंसूओ को पोछने के लिए
कोई रहे ना रहे
मैं हमेशा रहूँगा—-अभिषेक राजहंस

5 Comments

  1. kiran kapur gulati Kiran Kapur Gulati 20/09/2018
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 20/09/2018
  3. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 20/09/2018
  4. अंजली यादव Anjali yadav 21/09/2018

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