मेरी तकदीर हो तुम – शिशिर मधुकर

मेरी ग़ज़लों ने अब ये सच ज़माने को बताया है
मुहब्बत में किसी अपने ने मेरा दिल दुखाया है

कितने अशआर कह डाले मगर ग़म तो नही छूटे
किसी का ख्याल नस नस में खूं बन के समाया है

भले तुम हाँ नहीं भरते मुकर जाते हो महफिल में
मेरी तक़दीर हो तुम मैंने तो ये हर पल जताया है

मुझे अफ़सोस होता है कि तुमने दूरियां कर लीं
मैंने तो हाथ पकड़ा है तुमने जब जब बुलाया है

हुनर वो सीखना चाहे अब तो मधुकर यहाँ तुमसे
बड़ी आसानी से जिससे तुमने सब कुछ भुलाया है

शिशिर मधुकर

8 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 20/09/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/09/2018
  2. kiran kapur gulati Kiran Kapur Gulati 20/09/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/09/2018
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 20/09/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/09/2018
  4. mahendra gupta 20/09/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/09/2018

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