तेरी मुस्कान का जादू – शिशिर मधुकर

समां वो याद है मुझको जो तुम आँखों में भरते थे
बड़े नज़दीक आ कर के अपनों सी बात करते थे

मुहब्बत किस से हो जाए नहीं कोई नियम इसका
फूल महके तेरी मुस्कान के मेरी झोली में झरते थे

तेरे उस अपनेपन को आज तक भूला नहीं हूँ मैं
जब टूटा हुआ था मैं और हसीं सपने बिखरते थे

खुदा की महर थी मुझ पर जो तुम को बुला भेजा
मेरे अरमान तो वरना सभी तिल तिल हो मरते थे

तेरी मुस्कान का जादू है जिन्दा आज भी मधुकर
जिसकी एक झलक पा के बुझे चेहरे निखरते थे

शिशिर मधुकर

4 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 17/09/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/09/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 18/09/2018
  3. Mahendra Gupta 18/09/2018

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