जो मन आपस में मिल जाएँ – शिशिर मधुकर

जो मन आपस में मिल जाएँ जुदा वो हो नहीं पाते
जो मिल के भी नहीं मिलते वो तन्हा सो नहीं पाते

अनोखा सा जो रिश्ता है दर्द ए दिल का समुन्दर है
लिपट एक दूजे के सीने से वो अक्सर रो नहीं पाते

गरजता भी है वो बादल बरसता भी है वो हर पल
मगर जो छुप गए भीतर वो उनको भिगो नहीं पाते

जिम्मेदारी का ये बोझा जब से हमने सम्भाला है
मधुर सपने कोई अपने लिए अब संजो नहीं पाते

छाप असली मुहब्बत की कभी मिटती नहीं जग में
लाख कोशिश करी मधुकर इसे हम धो नहीं पाते

शिशिर मधुकर

6 Comments

  1. Rinki Raut Rinki Raut 17/09/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/09/2018
  2. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 17/09/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/09/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 19/09/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/09/2018

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