ख्यालों में – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

याद अक्सर आ जाती हो मेरे ख्यालों में
मुझे तो अब भी छोड़ दो मेरे इन हालों में।

चमकती रहो सितारों सा तुम जहाँ भी रहो
मुझे अंधेरा ठीक है तुम रहना उजालों में।

तुम जहाँ रहो रब करे जिंदगी चमकती रहे
मेरी तो अब किस्मत बंद हो गई तालों में।

प्यार हमनें भी किया था जो नागवार गुजरा
ना जाने कैसे उलझ गये उनके चालों में।

दर्द पर पत्थर रख कर दबा दिया सदा के लिए
अफसोस कि हम भी फंसे थे मकड़ जालों में।

7 Comments

  1. davendra87 davendra87 16/09/2018
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 18/09/2018
  2. Rinki Raut Rinki Raut 17/09/2018
    • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 18/09/2018
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 17/09/2018
  4. अंजली यादव अंजली यादव 18/09/2018
  5. C.M. Sharma C.M. Sharma 18/09/2018

Leave a Reply