दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

भाषा अविरल जानिये, हृदय तल पर भान
हिन्दी हिन्दुस्तान में, भर देती है जान।

सरल सुंदर सुडौल है, मीठे जिसके बोल
सरगम सी सुर – ताल है, संगम है अनमोल।

है गौरव करुणा मयी, सहज भाव के दीप
अनुपम जिसकी ताल है, जैसे मोती सीप।

3 Comments

  1. davendra87 davendra87 16/09/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 17/09/2018
  3. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 17/09/2018

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