कोई कारण तो होता है -शिशिर मधुकर

कोई भी सोच मेरी तो परे तुझ से ना जाती है
मुहब्बत कौन सा रंग अब मुझे आके दिखाती है

अधिकतर ज़िन्दगी गुजरी मगर तन्हा रहा हूँ मैं
मिलन की वो घड़ी अपने मुझे हरदम सताती है

किसी ने नींद लूटी है किसी ने चैन बरसाया
तेरी तस्वीर ही ख्वाबों में आ मुझको सुलाती है

जुबां कुछ भी नहीं कहती पास गैरों का डेरा है
तू ज़रा सामने आ जाए वो भी फिर गुनगुनाती है

जो भी होता है जीवन में कोई कारण तो होता है
ज़िंदगी राज़ निज सीने में कई मधुकर छुपाती है

शिशिर मधुकर

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 24/09/2018
    • Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/09/2018

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