स्कूटी वाली लड़की

मुझे उस पर
कभी कुछ लिखना न था
उससे मुझे
कभी कुछ कहना भी न था
उससे मुलाकात की
कोई नियति ना थी
ज़िन्दगी की अपनी ही गति थी
पर आज
उसकी कुछ आदते
यादे बन कर झगझोर रही थी
मुझे उसकी ओर मोड़ रही थी

वो लड़की
जो पढ़ती थी मेरे साथ
थोडी अजीब थी
थोड़ी बदतमीज भी थी
हर किसी से पंगे कर बैठती थी
हर किसी से उसके लफड़े थे
कॉलेज में कोई नहीं जो
उसका मजाक नहीं उड़ाता था
हर कोई उसे
स्कूटी वाली लड़की
कह कर चिढ़ाता था
उसके डिप लिपिस्टिक पर
हर कोई कमेंट करता था
कोई नहीं था
जो उसे समझता था

मुझे भी कहाँ पता था
जैसी दिखती थी वो
वैसी बिलकुल भी नहीं थी वो
उम्र भले पक्की थी उसकी
पर बच्ची थी वो
थोड़ी सेल्फिश थी जरुर
पर दिल की बुरी भी नहीं थी
उसे अपनों की फ़िक्र रहती थी
अपने दोस्तों पर जान भी छिडकती थी
पता नहीं
वो सचमुच अच्छी थी
या मुझे अच्छी लगनी लगी थी
वो स्कूटी वाली लड़की –अभिषेक राजहंस

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