ll हिन्दी का सम्मान ll

हिन्दी पखवाड़ा आते ही, कार्यालयों में हिन्दी का सम्मान बढ़ा ।
गुण गाये हिन्दी के सबने, अंग्रेजी के सिर दोष मढ़ा ॥ 1 ॥
प्रतियोगिताओं का कार्यालयों में, पखवाड़े तक दौर चला ।
कार्यक्रमों की धूम मची, वातावरण ज्यों इक नव रंग में ढ़ला ॥ 2 ॥
प्रतिदिन संकल्प लिया जाता, कि हिन्दी का होगा सम्मान ।
ह्रदय से कर स्वीकार इसे, बढ़ाएंगे इसका मान ॥ 3 ॥
लेखन, स्लोगन, काव्य पाठ मे, समय का चक्र चलता जाता ।
नित्य होतीं नव प्रतियोगिताएं में, समय का पता ना चल पाता ॥ 4 ॥
पुरस्कार पाने हेतु कर्मियों का, हिन्दी के प्रति बढ़ता अनुराग ।
कार्यालय में नव जोश जगाता, अंग्रेजी मानो गई हो भाग ॥ 5 ॥
दोष नए-नए अंग्रेजी के, नित-प्रति जिह्वा पर आते ।
हिन्दी को देने को मान, गुण इसके गाए जाते ॥ 6 ॥
पुरस्कारों के निर्णय का दिन, आखिर आ ही गया ।
घोषणा का समय-चक्र अंतत:, अपनी धुरी पर आ ही गया ॥ 7 ॥
बिना किसी को छोड़े हुए, सबको दिए गए पुरस्कार ।
किसी को ना किया असंतुष्ट, सबने पाए नव उपहार ॥ 8 ॥
हिन्दी रख दी ताक पर, रखा न कोई विवाद ।
कहा तुम्हें अब याद करेंगे, एक बरस के बाद ॥ 9 ॥
हिन्दी का ऐसा सम्मान देख, मन में मेरे आया विचार ।
कैसे इसे स्वीकारूं ह्र्दय से, बरस भर को यह गई पार ॥ 10 ॥
पखवाड़े की बीती अवधि, होगा अंग्रेजी की मान ।
बैनर, पोस्टर होंगे बाहर, बरस बाद फिर होगा भान ॥ 11 ॥
अगले बरस फिर पखवाड़े मे, आएगी हिन्दी की याद ।
कैसे उसे सम्मान दिलाऊँ, अपनों के बीच जो हो बरबाद ॥ 12 ॥
ऐ मेरे प्रिय बन्धुओं, अंग्रेजी का महत्व भी हमको है स्वीकार ।
किंन्तु हमारी अपनी भाषा को भी, हम ना कर सकते नकार ॥ 13 ॥
ज्ञान कदापि ना है त्याज्य, भाषा कोई भी नहीं अपूर्ण ।
पर मान उसे ही दो, होता जिससे हो उद्देश्य पूर्ण ॥ 14 ॥
अभिव्यक्ति का माध्यम होती भाषा, विचारों का करती आदान-प्रदान ।
हिन्दी को स्वीकारो मन से, दो इसको यथायोग्य सम्मान ॥ 15 ॥

अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव

2 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 15/09/2018
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 16/09/2018

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